Swadeshi Chikitsa · स्वदेशी चिकित्सा
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सवाल — जवाब
"यदि आप किसी को रोटी खिलाते हैं तो उसका सिर्फ एक दिन पेट भरेगा, लेकिन आप उसे रोटी बनाने का तरीका सीखा देते हैं तो जिंदगी भर पेट भरेगा।"
— श्री राजीव दीक्षित जीप्राचीन गुरूकुलों में वेद, दर्शन, उपनिषद, व्याकरण के साथ गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, चिकित्सा, भूगोल, खगोल, शिल्प, संगीत, तकनीकी, राजनीती, अर्थशास्त्र, योग, यज्ञ एवं कृषि — मनुष्य के भौतिक तथा आध्यात्मिक उन्नति के लिये आवश्यक सभी विषय पढ़ाये जाते थे।
राष्ट्र की खोई गरिमा गुरूकुल शिक्षा प्रणाली की पुनः स्थापना करने से आयेगी। जब हम अपनी जड़ों से जुड़ेंगे और स्वदेशी ज्ञान व चिकित्सा को अपनाएंगे।
हमें पढ़ाया जाता है कि भारत सबसे पिछड़ा देश रहा, भारत ने दुनिया को कुछ नहीं दिया। लेकिन सत्य यह है कि भारत ने आयुर्वेद, योग, गणित, खगोल विज्ञान जैसे अनेक क्षेत्रों में विश्व को अमूल्य ज्ञान दिया है।
पाश्चात्य देशों में जिन रसायनों पर पाबंदी है, वैसे जहर तीसरे विश्व में उड़ेले जा रहे हैं। महाराष्ट्र व आंध्रप्रदेश में कीटनाशकों के कारण खेत मजदूरों में कैंसर, अंगविकृतियां और गंभीर रोग देखे गए हैं।
बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों ने चिकित्सकों को प्रलोभन देकर अपना एजेंट बना लिया है। महंगी दवाइयाँ बेचकर वे करोड़ों कमाती हैं, जबकि स्वदेशी आयुर्वेदिक उपाय बेहतर और सस्ते हैं।