Vedic Mathematics
स्वामी भारती कृष्ण तीर्थजी द्वारा पुनः-प्रकटित — 16 सूत्र और 13 उपसूत्र जो किसी भी गणितीय समस्या को मानसिक गणना से हल कर देते हैं।
सूत्र देखें →वैदिक गणित — स्वामी भारती कृष्ण तीर्थजी (1884–1960) ने अथर्ववेद के परिशिष्ट से 16 सूत्र और 13 उपसूत्र पुनः खोजे जो किसी भी गणितीय समस्या का मानसिक गणना द्वारा तीव्र गति से हल करते हैं।
इन सूत्रों से गुणा, भाग, वर्गमूल, घनमूल, त्रिकोणमिति और कलन (Calculus) तक — सब कुछ परंपरागत तरीके से 10 से 15 गुना तेज़ हल होता है।
NASA, IIT, Oxford जैसे संस्थानों में वैदिक गणित पढ़ाई जाती है। Competition Exams में यह अत्यंत उपयोगी है।
प्रत्येक सूत्र एक गणितीय नियम है। नीचे सभी 16 सूत्र, उनका अर्थ, उपसूत्र और उदाहरण।
जब दोनों संख्याओं का योग 10, 100, 1000 हो। पहली संख्या में 1 जोड़ें और दोनों का गुणा करें।
आधार (10, 100, 1000...) से प्रत्येक अंक को 9 से और अंतिम अंक को 10 से घटाएँ। बेस के पास की संख्याओं के गुणन में उपयोगी।
दो अंकों की संख्याओं का तीन चरणों में गुणा। ऊर्ध्व (Vertical) और तिर्यक् (Cross-wise) गुणन।
भाजक को उलटकर उपयोग करें। विशेषतः बड़े भाजकों के लिए। सभी अंकों के चिह्न बदल दें।
जब दोनों पक्षों का योग समान हो, तो योग = 0। समीकरण हल करने की अद्भुत विधि।
संख्या को किसी सुविधाजनक अनुपात में बदलकर गणना करें। बड़ी संख्याओं को सरल बनाता है।
जब दो समीकरणों में गुणांकों का योग और अंतर बराबर हो — जोड़ और घटाव से हल निकालें।
अपूर्ण संख्या को पूर्ण बनाकर या घटाकर गणना सरल बनाएँ। वर्गों और घन में उपयोगी।
अन्तर और समानता के सिद्धांत से हल। HCF, आव्यूह और बहुपद के गुणनखंड निकालने में।
वर्ग निकालने की सरल विधि। आधार से कमी निकालें, दोनों तरफ से घटाएँ और कमी का वर्ग जोड़ें।
अंशों और पूर्ण के सम्बन्ध से गणना। वर्गमूल, घनमूल और जटिल समीकरणों में उपयोगी।
अंतिम अंक के अनुसार शेषफल ज्ञात करें। भाग में सरलीकरण और बहुपद भाग में उपयोगी।
अंतिम पद और अंत से दूसरे पद का दोगुना जोड़ें। विशेष प्रकार के भाग के लिए।
9 से गुणा करने की अत्यंत सरल विधि। पहले अंक में से 1 घटाएँ और 9 से पूरक लें।
गुणनफल का योग = पदों के योगों का गुणनफल। बहुपद सत्यापन और गुणनखंड जाँच के लिए।
गुणकों का योग = योग के गुणक। बहुपदों के गुणनखंड खोजने की अत्यंत सरल विधि।
उपसूत्र मुख्य सूत्रों के सहायक हैं। ये विशेष परिस्थितियों में लागू होते हैं।
प्रमुख सूत्रों को इंटरैक्टिव रूप से आज़माएँ।
| # | सूत्र (Hindi) | English | वर्ग | उपसूत्र | उपयोग |
|---|---|---|---|---|---|
| 01 | एकाधिकेन पूर्वेण | By one more than previous | गुणन | आनुरूप्येण | n5 × n5, आवर्ती भाग |
| 02 | निखिलं नवतश्चरमं | All from 9, last from 10 | घटाव | सिद्धः केवलैः | 100/1000 के पास गुणन |
| 03 | ऊर्ध्वतिर्यग्भ्याम् | Vertically and crosswise | गुणन | लोपनस्थापनाभ्याम् | 2+ अंकों का गुणन |
| 04 | परावर्त्य योजयेत् | Transpose and adjust | भाग | आद्यमाद्येन | बड़े भाजक से भाग |
| 05 | शून्यं साम्यसमुच्चये | When sum is same it's zero | सामान्य | यावदूनम् | समीकरण हल |
| 06 | आनुरूप्येण | Proportionately | गुणन | — | अनुपात गुणन |
| 07 | संकलनव्यवकलनाभ्याम् | By addition and subtraction | घटाव | — | युगपत् समीकरण |
| 08 | पूरणापूरणाभ्याम् | By completion/non-completion | सामान्य | आनुरूप्येण | वर्ग पूर्णता |
| 09 | चलनकलनाभ्याम् | Differences and similarities | भाग | — | HCF, गुणनखंड |
| 10 | यावदूनम् | By the deficiency | वर्ग | यावदूनं तावदूनम् | 100/1000 के पास वर्ग |
| 11 | व्यष्टिसमष्टिः | Part and whole | वर्ग | — | वर्गमूल, घनमूल |
| 12 | शेषाण्यङ्केन चरमेण | Remainders by last digit | सामान्य | — | 9 से भाग |
| 13 | सोपान्त्यद्वयमन्त्यम् | Ultimate and twice penultimate | सामान्य | — | आंशिक भिन्न |
| 14 | एकन्यूनेन पूर्वेण | By one less than previous | गुणन | निखिलं | 9, 99, 999 से गुणन |
| 15 | गुणितसमुच्चयः | Product of sum = sum of product | वर्ग | — | बहुपद सत्यापन |
| 16 | गुणकसमुच्चयः | Factors of sum = sum of factors | सामान्य | समुच्चयगुणितः | बहुपद गुणनखंड |