यज्ञ

Gurukul Vidya Series • गुरुकुल विद्या

यज्ञ विद्या

अग्नि का दिव्य विज्ञान

यज्ञो वै श्रेष्ठतमं कर्म — यज्ञ सभी कर्मों में श्रेष्ठ है।

"Yajna is the most excellent of all actions." — Shatapatha Brahmana

अग्निहोत्र सोमयाग अश्वमेध राजसूय वाजपेय पुत्रकामेष्टि गायत्री यज्ञ
अग्नि-विज्ञान में प्रवेश करें
नीचे
400+यज्ञ-प्रकार
7श्रौत-अग्नियाँ
5पञ्च महायज्ञ
3प्रमुख यज्ञ-वर्ग
4ऋत्विज (पुरोहित)

यज्ञ विद्या क्या है?

यज्ञ — संस्कृत के "यज्" धातु से जन्मा शब्द जिसके तीन अर्थ हैं — देवपूजन, संगतिकरण और दान। यज्ञ केवल अग्नि में आहुति देने की क्रिया नहीं — यह एक सम्पूर्ण विज्ञान है जो वायु-शुद्धि, पर्यावरण-संतुलन, कृषि-उन्नति और आत्मिक उत्थान को एक साथ साधता है।

वैदिक यज्ञ-विद्या विश्व का प्राचीनतम पर्यावरण-विज्ञान है। गाय के घी, समिधा और औषधीय जड़ी-बूटियों की आहुति से निकलने वाला धुआँ वायुमण्डल को शुद्ध करता है और वर्षा-चक्र को संतुलित रखता है।

भगवद्गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं — "सहयज्ञाः प्रजाः सृष्ट्वा" — प्रजापति ने सृष्टि के साथ-साथ यज्ञ की भी रचना की। यज्ञ और सृष्टि का अटूट सम्बन्ध है।

अन्नाद्भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसम्भवः।
यज्ञाद्भवति पर्जन्यो यज्ञः कर्मसमुद्भवः॥
"प्राणी अन्न से जीते हैं, अन्न वर्षा से होता है, वर्षा यज्ञ से होती है — यज्ञ कर्म से उत्पन्न होता है।" — भगवद्गीता ३.१४
मूल वेदयजुर्वेद — यज्ञ-विधि का वेद
प्रमुख ग्रन्थशतपथ ब्राह्मण, तैत्तिरीय
चार ऋत्विजहोता, अध्वर्यु, उद्गाता, ब्रह्मा
मुख्य तत्वअग्नि, मन्त्र, द्रव्य, श्रद्धा
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Sacred Fires

पञ्च अग्नियाँ — पाँच पवित्र अग्नियाँ

वैदिक यज्ञ में पाँच प्रकार की अग्नियाँ प्रज्वलित की जाती हैं — प्रत्येक का अपना विशेष महत्व।

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गार्हपत्य
Householder's Fire

पश्चिम में स्थापित — गृहस्थ की मुख्य अग्नि। सदा जलती रहती है। इसी से अन्य अग्नियाँ प्रज्वलित होती हैं।

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आहवनीय
Offering Fire

पूर्व में स्थापित — देवताओं को आहुति देने की अग्नि। यज्ञ की मुख्य वेदी। सोम-यज्ञ में सर्वाधिक महत्व।

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दक्षिणाग्नि
Southern Fire

दक्षिण में स्थापित — पितरों की अग्नि। श्राद्ध और पितृ-यज्ञ में उपयोग। मृत्यु-सम्बन्धी कर्म।

सभ्याग्नि
Assembly Fire

सभा-मण्डप में — समाज और राज्य की अग्नि। सार्वजनिक यज्ञ और राजकीय अनुष्ठानों में।

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आवसथ्याग्नि
Shelter Fire

निवास-स्थान की अग्नि। गृह-प्रवेश, नवनिर्माण और यात्रा-प्रारम्भ के समय प्रज्वलित।

Three Categories

यज्ञ के तीन प्रमुख वर्ग

सभी 400+ यज्ञों को तीन मुख्य वर्गों में विभाजित किया जाता है।

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श्रौत यज्ञ
Vedic • Grand Sacrifices

श्रुति (वेद) के विधान के अनुसार किए जाने वाले महायज्ञ। तीन वेदियाँ, चारों ऋत्विज अनिवार्य। राजाओं और महर्षियों द्वारा। बहुत बड़े पैमाने पर, वर्षों तक चलने वाले।

अग्निहोत्र
प्रतिदिन सूर्योदय-सूर्यास्त पर। सबसे सरल श्रौत यज्ञ।
दर्शपूर्णमास
अमावस्या और पूर्णिमा पर। प्रत्येक गृहस्थ का कर्तव्य।
चातुर्मास्य
प्रत्येक चार माह पर। ऋतु-यज्ञ।
सोमयाग
सोम-रस की आहुति। वैदिक काल का सर्वश्रेष्ठ यज्ञ।
अश्वमेध
राजसूय से बड़ा — राज्य-विस्तार और समृद्धि के लिए।
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गृह्य यज्ञ
Domestic • Household Rites

गृहसूत्रों के विधान से गृहस्थ द्वारा अपने घर की अग्नि में। एक ऋत्विज पर्याप्त। संस्कारों और पञ्च-महायज्ञ का आधार। प्रतिदिन का अनुष्ठान।

विवाह-अग्नि
सप्तपदी — विवाह के सात फेरे। गृहस्थी की आधार-अग्नि।
षोडश संस्कार
जन्म से मृत्यु तक के सभी संस्कार यज्ञ-विधि से।
बलिवैश्वदेव
प्रतिदिन भोजन से पहले पञ्चभूत-तर्पण।
उपाकर्म
श्रावण पूर्णिमा — वेद-अध्ययन का शुभारम्भ।
श्राद्ध
पितृ-तर्पण — पूर्वजों की स्मृति में यज्ञ।
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काम्य यज्ञ
Optional • Wish-Fulfilling

किसी विशेष कामना की पूर्ति के लिए। पुत्र-प्राप्ति, वर्षा, रोग-निवारण, शत्रु-शमन आदि। नित्य नहीं — इच्छानुसार। अथर्ववेद में इनकी विस्तृत विधि।

पुत्रकामेष्टि
पुत्र-प्राप्ति की कामना से। राजा दशरथ ने यही किया था।
वृष्टि-कामेष्टि
वर्षा के लिए। सूखे में पर्जन्य-यज्ञ।
आयुष्य-यज्ञ
दीर्घायु के लिए। महामृत्युंजय-जप सहित।
धन-यज्ञ
समृद्धि और ऐश्वर्य के लिए लक्ष्मी-यज्ञ।
शान्ति-यज्ञ
अशान्ति, रोग, महामारी-निवारण के लिए।
Daily Practice

अग्निहोत्र — प्रतिदिन का यज्ञ

सूर्योदय और सूर्यास्त पर गाय के घी से अग्नि में आहुति — सबसे सरल और सर्वाधिक प्रभावशाली यज्ञ।

अग्निहोत्र

Agnihotra • Daily Fire Ritual

अग्निहोत्र वैदिक काल से आज तक अनवरत चली आ रही परंपरा है। इसे सबसे छोटा श्रौत यज्ञ माना जाता है। प्रतिदिन सूर्योदय और सूर्यास्त के ठीक समय — गाय के घी, चावल और तिल की आहुति दी जाती है।

आधुनिक शोध में पाया गया है कि अग्निहोत्र का धुआँ वायुमण्डल में मौजूद हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है और वातावरण में नकारात्मक आयन बढ़ाता है जो मन और शरीर के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।

भोपाल गैस त्रासदी (1984) में एक परिवार जो नित्य अग्निहोत्र करता था — वह अत्यंत निकट होने के बावजूद प्रभावित नहीं हुआ। यह घटना आधुनिक विज्ञान के लिए आश्चर्य का विषय बनी।

अग्निहोत्रं जुहुयाद्यावदायुषम् — जब तक जीवन है, अग्निहोत्र करो।
शतपथ ब्राह्मण

🔥 अग्निहोत्र विधि — क्रमशः

1
कुण्ड-स्थापना
ताँबे का गाय-मुख आकार का पात्र। गाय के गोबर से लिपाई। पूर्व या उत्तर दिशा में रखें।
2
समिधा-प्रज्वलन
आम, पीपल या अन्य शुभ वृक्ष की समिधा से अग्नि प्रज्वलित करें। अग्नि स्थिर होने पर आहुति।
3
प्रातः-कालीन आहुति
सूर्योदय के ठीक समय — दो आहुतियाँ।
सूर्याय स्वाहा। सूर्याय इदं न मम।।
प्रजापतये स्वाहा। प्रजापतये इदं न मम।।
4
सायं-कालीन आहुति
सूर्यास्त के ठीक समय — दो आहुतियाँ।
अग्नये स्वाहा। अग्नये इदं न मम।।
प्रजापतये स्वाहा। प्रजापतये इदं न मम।।
5
भस्म-ग्रहण
यज्ञ की राख (भस्म) अत्यंत पवित्र और औषधीय है। इसे फेंकें नहीं — वनस्पतियों में डालें।
Sacred Materials

यज्ञ-सामग्री — आहुति के पदार्थ

यज्ञ में डाले जाने वाले प्रत्येक पदार्थ का वैज्ञानिक महत्व है — ये सभी वायु-शुद्धि और औषधीय गुण रखते हैं।

🧈
गाय का घी
Cow Ghee

यज्ञ की मुख्य आहुति। गाय के शुद्ध घी का दहन प्रोपिओनिक एसिड मुक्त करता है जो हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है।

वायु-शुद्धि + ओजोन-परत संरक्षण
🌾
जौ / चावल
Barley & Rice

अन्न की आहुति — अर्थव्यवस्था और समृद्धि का प्रतीक। जलने पर इथिलीन ऑक्साइड और प्रोपिलीन मुक्त होते हैं।

जीवाणु-नाशक + वर्षा-प्रेरक
🌿
समिधा
Sacred Wood

आम, पीपल, अश्वत्थ, पलाश की लकड़ी। विशेष वृक्षों की समिधा का धुआँ वायु में एन्टी-बायोटिक गुण छोड़ता है।

हवा में एन्टी-बायोटिक फैलाव
तिल
Sesame Seeds

श्राद्ध और पितृ-यज्ञ में विशेष। तिल का दहन वायुमण्डल में एन्टी-ऑक्सीडेन्ट फैलाता है।

पितृ-तर्पण + वायु-शोधन
🪔
गोमय (गोबर)
Cow Dung Cakes

गाय के गोबर के उपले — प्रदूषण-अवशोषक। गोबर का धुआँ मच्छर और कीटाणुओं को दूर करता है।

कीट-नाशक + विकिरण-अवशोषण
🌸
औषधि-वनस्पति
Medicinal Herbs

अश्वगंधा, गिलोय, तुलसी, नीम, हल्दी, लौंग, इलायची — विशेष यज्ञों में इनकी आहुति दी जाती है।

रोग-निवारण + आयुर्वेदिक प्रसार
🍯
मधु
Honey

विशेष यज्ञों में मधु की आहुति। मधु के एन्टी-बायोटिक गुण वायुमण्डल में फैलते हैं।

सौम्यता + वायु-मधुरता
🏵️
सोम
Soma Plant

वैदिक काल का रहस्यमय पौधा — महायज्ञों में इसका रस निचोड़कर देवताओं को अर्पित किया जाता था।

दिव्य शक्ति + वर्षा-प्रेरक
Sacred Altars

यज्ञकुण्ड के आकार और प्रयोजन

यज्ञकुण्ड का आकार यज्ञ के उद्देश्य के अनुसार निर्धारित होता है — शुल्बसूत्र में इनकी सटीक माप दी गई है।

चतुरस्र
वर्गाकार कुण्ड

सर्वाधिक प्रचलित। नित्य-यज्ञ और सामान्य हवन के लिए। चारों दिशाओं का प्रतीक।

शान्ति + समृद्धि
🔺
त्रिकोण
त्रिभुज कुण्ड

शत्रु-शमन, तान्त्रिक यज्ञ और विशेष कामनाओं के लिए। तीव्र ऊर्जा-संचरण।

अभिचार + शत्रु-निवारण
वृत्त
गोलाकार कुण्ड

मोक्ष-साधना और आत्मिक उत्थान के लिए। अनन्तता का प्रतीक — ब्रह्म-प्राप्ति।

मोक्ष + आध्यात्मिक उन्नति
षट्कोण
षड्भुज कुण्ड

ऐश्वर्य और सम्पदा के लिए। छः दिशाओं की शक्तियों को आकर्षित करने वाला।

धन + वैभव
🔮
अष्टकोण
अष्टभुज कुण्ड

रोग-निवारण और आयुर्वर्धन के लिए। आठ दिग्पालों की शक्ति एकत्र होती है।

आरोग्य + दीर्घायु
🌸
पद्म
कमल-आकार कुण्ड

देवी-यज्ञ और नवरात्र-यज्ञ के लिए। कमल की पंखुड़ियों जैसा — शक्ति-साधना।

शक्ति-उपासना
🔻
योनि
योनि-आकार कुण्ड

प्रजनन, सन्तान और सृजन के लिए। तांत्रिक यज्ञों में विशेष महत्व।

प्रजनन + सन्तान
🦅
श्येन (गरुड़)
गरुड़-आकार कुण्ड

विशाल श्रौत यज्ञों में। हजारों ईंटों से निर्मित विशाल गरुड़-वेदी — अग्निचयन के लिए।

महायज्ञ + राज्य-विस्तार
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यज्ञ का आधुनिक विज्ञान

आधुनिक वैज्ञानिक शोधों ने यज्ञ की वैज्ञानिकता को प्रमाणित किया है। IIT Bombay, IARI और अनेक विदेशी संस्थानों के शोध इसकी पुष्टि करते हैं।

🦠
जीवाणु-नाशक

अग्निहोत्र के धुएँ में फॉर्मेल्डिहाइड, प्रोपिलीन ऑक्साइड और इथिलीन ऑक्साइड मिलते हैं — ये हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करते हैं। WHO द्वारा मान्यता प्राप्त।

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वर्षा-चक्र

यज्ञ के धुएँ में बादल-निर्माण के लिए आवश्यक नाभिकीय कण (Cloud Condensation Nuclei) होते हैं। वैदिक ऋषि इसीलिए यज्ञ को वर्षा से जोड़ते थे।

🧠
मानसिक प्रभाव

यज्ञ का धुआँ नकारात्मक आयन (Negative Ions) बढ़ाता है जो सेरोटोनिन का स्तर बढ़ाकर मन को शान्त करते हैं। अवसाद और चिन्ता में लाभकारी।

Historic Sacrifices

इतिहास के प्रसिद्ध यज्ञ

वेद, रामायण, महाभारत और इतिहास में वर्णित महान यज्ञ जिन्होंने इतिहास की दिशा बदली।

01
राजकीय यज्ञ
अश्वमेध यज्ञ
Ashvamedha • Horse Sacrifice

राज्य-विस्तार और सम्राट-पद की प्राप्ति के लिए। एक घोड़ा वर्षभर स्वच्छन्द विचरण करता — जो रोके वह युद्ध करे। युधिष्ठिर, राम के पुत्रों ने यह यज्ञ किया।

महाभारतरामायणराजसूय से बड़ा
02
राजकीय यज्ञ
राजसूय यज्ञ
Rajasuya • King's Consecration

सम्राट के अभिषेक का यज्ञ। युधिष्ठिर का राजसूय यज्ञ महाभारत में वर्णित है जिसमें सभी राजाओं ने भाग लिया। इसी के समय शिशुपाल-वध हुआ।

युधिष्ठिरसम्राट-पदमहाभारत
03
पुत्र-कामना
पुत्रकामेष्टि
Putrakameshti • Son-seeking Yajna

राजा दशरथ ने ऋष्यश्रृंग के नेतृत्व में यह यज्ञ किया। यज्ञ की पायस (खीर) से राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। रामायण का आधार।

राजा दशरथऋष्यश्रृंगरामायण
04
ज्ञान-यज्ञ
विश्वामित्र यज्ञ
Vishwamitra's Yajna

विश्वामित्र ने राक्षसों से यज्ञ-रक्षा के लिए राम-लक्ष्मण को लिया। इसी यात्रा में राम ने ताड़का-वध, सुबाहु-वध किया और सीता-स्वयंवर में पहुँचे।

विश्वामित्रराम-लक्ष्मणरामायण
05
सार्वजनिक यज्ञ
वाजपेय यज्ञ
Vajapeya • Drink of Strength

शक्ति और विजय के लिए। 17 रथों की दौड़ इसकी विशेषता। राजा और ब्राह्मण दोनों इसे कर सकते थे। शतपथ ब्राह्मण में विस्तृत विधि।

शक्ति-यज्ञ17 रथ-दौड़राजन्य-ब्राह्मण
06
ऋषि यज्ञ
सोमयाग
Somayaga • Soma Offering

वैदिक काल का सर्वश्रेष्ठ महायज्ञ। सोम-रस निचोड़कर इन्द्र, वरुण को अर्पित। केरल में आज भी पारम्परिक विधि से होता है — अन्तर्राष्ट्रीय शोध-केन्द्र।

सोम-रसकेरल परंपरावैदिक काल
Sacred Chants

यज्ञ के प्रमुख मंत्र

ये मंत्र यज्ञ की आत्मा हैं — इनके बिना यज्ञ निष्फल माना जाता है।

यजुर्वेद ३.१ • प्रमुख आहुति मंत्र
अग्न आ याहि वीतये गृणानो हव्यदातये।
नि होता सत्सि बर्हिषि।।
हे अग्नि! आओ, यज्ञ के भोग के लिए, स्तुति से आमंत्रित होकर, हव्य-दान के लिए। इस यज्ञ में होता बनकर बैठो।
भगवद्गीता ४.२४ • ब्रह्म-यज्ञ मंत्र
ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्।
ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना।।
अर्पण भी ब्रह्म है, हवि भी ब्रह्म है, ब्रह्म की अग्नि में ब्रह्म द्वारा हुत। जो ब्रह्म-कर्म-समाधि में है वह ब्रह्म को ही प्राप्त होता है।
ऋग्वेद १.१.१ • अग्नि-सूक्त
अग्निमीळे पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम्।
होतारं रत्नधातमम्।।
मैं अग्नि की स्तुति करता हूँ जो यज्ञ के पुरोहित, देव, ऋत्विज, होता और रत्नों के दाता हैं। ऋग्वेद का प्रथम मंत्र।
यजुर्वेद ३.१ • स्वाहा मंत्र
इदं अग्नये। इदं न मम।।
इदं इन्द्राय। इदं न मम।।
"यह अग्नि को — यह मेरा नहीं। यह इन्द्र को — यह मेरा नहीं।" — त्याग-भावना का सर्वोच्च प्रकटीकरण। "स्वाहा" के साथ बोला जाता है।
अथर्ववेद • पर्यावरण मंत्र
वायुरनिलममृतमथेदं भस्मान्तं शरीरम्।
ओ३म् क्रतो स्मर कृतं स्मर।।
वायु अमर है — यह शरीर अन्त में भस्म हो जाएगा। हे क्रतु (यज्ञ)! स्मरण कर — जो किया है उसे स्मरण कर।
शतपथ ब्राह्मण • यज्ञ-फल
यज्ञो वै विष्णुः। तस्माद्यज्ञं कुर्वन्तः
विष्णुमेव भजन्ति।।
यज्ञ ही विष्णु है। इसलिए जो यज्ञ करते हैं वे विष्णु की ही भक्ति करते हैं। यज्ञ और ईश्वर की अभिन्नता।
Benefits

यज्ञ के लाभ — भौतिक और आत्मिक

वैदिक शास्त्र और आधुनिक विज्ञान दोनों यज्ञ के इन लाभों की पुष्टि करते हैं।

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वायु-शुद्धि
Air Purification

यज्ञ का धुआँ वायुमण्डल में हानिकारक जीवाणुओं और विषाणुओं को नष्ट करता है। एक घण्टे के अग्निहोत्र से 50 वर्गमीटर क्षेत्र की वायु शुद्ध होती है।

वर्षा और जलचक्र
Rain Cycle Regulation

यज्ञ के धुएँ के कण वर्षा के लिए आवश्यक नाभिक बनाते हैं। वैदिक भारत में नियमित यज्ञ से सम-वर्षा और उचित ऋतु-चक्र बना रहता था।

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कृषि-उन्नति
Agricultural Benefits

यज्ञ की राख भूमि में मिलाने से उर्वरा शक्ति बढ़ती है। यज्ञ के पर्यावरण में उगाई फसलें अधिक पोषक और रोग-प्रतिरोधी होती हैं।

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मानसिक शान्ति
Mental Peace

यज्ञ का वातावरण — मंत्र-ध्वनि, अग्नि की ऊष्मा और सुगन्धित धुआँ — मस्तिष्क की अल्फा तरंगें बढ़ाता है। तनाव और अवसाद कम होता है।

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रोग-निवारण
Disease Prevention

औषधीय जड़ी-बूटियों की आहुति से श्वास द्वारा शरीर में प्रवेश — सर्दी-खाँसी, दमा, त्वचा-रोग में लाभकारी। प्राचीन आयुर्वेद में धूम-चिकित्सा का वर्णन।

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सामाजिक एकता
Social Harmony

सामूहिक यज्ञ में सभी वर्ग साथ बैठते हैं — समानता और एकता का व्यावहारिक प्रदर्शन। "संगच्छध्वं संवदध्वं" की भावना यज्ञ से साकार होती है।

Questions

प्रश्नोत्तर

यज्ञ विद्या के बारे में सामान्य जिज्ञासाएँ

क्या यज्ञ में जानवरों की बलि दी जाती है?

+
नहीं। वैदिक यज्ञ में जीव-हिंसा का कोई स्थान नहीं। "अज" का अर्थ बीज होता है — पशु नहीं। बाद के काल में कुछ पुराणों में बलि का उल्लेख है किन्तु यह मूल वेद-विधान नहीं। स्वामी दयानंद सरस्वती और अन्य वैदिक विद्वानों ने इसे स्पष्ट किया। वैदिक यज्ञ सम्पूर्णतः शाकाहारी और अहिंसक है।

अग्निहोत्र घर पर कैसे शुरू करें?

+
  • सामग्री — ताँबे का कुण्ड, गाय का घी, चावल, गाय के गोबर के उपले, आम की समिधा
  • समय — सूर्योदय और सूर्यास्त के ठीक समय (पंचांग देखें)
  • मंत्र — "अग्नये स्वाहा" और "सूर्याय स्वाहा" — यही पर्याप्त
  • स्थान — खुले स्थान पर, पूर्वाभिमुख, शान्त वातावरण
  • अधिक जानकारी — Agnihotra.org, श्री वसंत पारंजपे की पुस्तकें

क्या स्त्रियाँ यज्ञ कर सकती हैं?

+
बिल्कुल। वैदिक काल में स्त्रियाँ यज्ञ करती थीं — लोपामुद्रा, घोषा, अपाला जैसी ऋषिकाएँ यज्ञ में भाग लेती थीं। विवाह-यज्ञ में पत्नी पति के साथ समान रूप से भाग लेती है — "यज्ञे ब्रह्मदत्तपत्नी"। आज भी यज्ञशाला में महिलाएँ यज्ञ करती हैं। पुत्री भी श्राद्ध और पितृ-यज्ञ कर सकती है।

यज्ञ और हवन में क्या अंतर है?

+
यज्ञ एक विशाल अवधारणा है जिसमें हवन, होम, अग्निहोत्र सब आते हैं। यज्ञ में वेद-विधि के अनुसार चार ऋत्विजों का होना, विशेष कुण्ड, विशेष मंत्र अनिवार्य हैं। हवन या होम सरल घरेलू रूप है — एक व्यक्ति कर सकता है। अग्निहोत्र — सबसे सरल, प्रतिदिन किया जाने वाला हवन।

क्या यज्ञ से वायु-प्रदूषण नहीं बढ़ता?

+
नहीं — वैदिक यज्ञ के धुएँ और सामान्य लकड़ी-जलाने के धुएँ में बहुत अंतर है। शुद्ध घी, औषधीय जड़ी-बूटियों और विशेष समिधाओं के जलने से जो पदार्थ निकलते हैं वे वायु-शुद्धक हैं — प्रदूषणकारी नहीं। IIT मुम्बई के शोध ने पाया कि अग्निहोत्र से PM2.5 और PM10 वायु-प्रदूषण में 30-40% की कमी आती है।

सोमयाग आज भी होता है?

+
हाँ। केरल के नम्बूदरी ब्राह्मण आज भी पारम्परिक पद्धति से सोमयाग करते हैं। 1975 में पुणे और 1990 में केरल में सोमयाग हुए। हार्वर्ड, ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज के विद्वान इसे देखने आए। यह यज्ञ 3,000+ वर्षों से अनवरत चल रही परंपरा का जीवित प्रमाण है।