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अष्टांगहृदयम् : भाग 1 भाग 2 भाग 3 भाग 4
महर्षि वाग्भट्ट रचित ग्रंथ पर आधारित — भाग तृतीय

अष्टांगहृदयम् भाग-3 से सीखें उदर व मल-मूत्र संबंधी रोगों की आयुर्वेदिक दृष्टि

अर्श (बवासीर), अतिसार (दस्त), ग्रहणी (दीर्घकालिक अपच), मूत्र रोग, प्रमेह (मधुमेह से संबंधित), विद्रधि (फोड़ा), गुल्म (पेट की गांठ) एवं उदर रोग (जलोदर) के कारण, वर्गीकरण व आयुर्वेदिक दृष्टिकोण पर आधारित व्यवहारिक कोर्स। हर दिन पर क्लिक करें और पूरी जानकारी पढ़ें।

📖 स्रोत ग्रंथ: अष्टांगहृदयम् भाग-3 (ऋषि वाग्भट्ट द्वारा रचित / श्री राजीव दीक्षित संकलन-संपादन)
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यह पृष्ठ अष्टांगहृदयम् ग्रंथ के ज्ञान का शैक्षणिक सार-संक्षेप है, चिकित्सकीय सलाह नहीं। बवासीर में रक्तस्राव, लगातार दस्त, पेट में गांठ, फोड़ा, जलोदर या मधुमेह जैसे लक्षणों में स्वयं औषधि/क्षार-अग्नि-शल्य कर्म का प्रयोग न करें — किसी योग्य चिकित्सक या वैद्य से अवश्य परामर्श लें।

०१अर्श रोग
०२अतिसार रोग
०३ग्रहणी रोग
०४मूत्र रोग
०५प्रमेह रोग
०६विद्रधि रोग
०७गुल्म रोग
०८उदर रोग
पूरा पाठ्यक्रम

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अर्श रोग अतिसार रोग ग्रहणी रोग मूत्र रोग प्रमेह रोग विद्रधि रोग गुल्म रोग उदर रोग
अध्याय 1

अर्श रोग (बवासीर) चिकित्सा

दिन 1 – 4
अध्याय 2

अतिसार (दस्त) रोग चिकित्सा

दिन 5 – 7
अध्याय 3

ग्रहणी (दीर्घकालिक अपच) रोग चिकित्सा

दिन 8 – 10
अध्याय 4

मूत्र रोग चिकित्सा

दिन 11 – 12
अध्याय 5

प्रमेह रोग चिकित्सा

दिन 13 – 15
अध्याय 6

विद्रधि (फोड़ा) रोग चिकित्सा

दिन 16 – 17
अध्याय 7

गुल्म (पेट की गांठ) रोग चिकित्सा

दिन 18 – 20
अध्याय 8

उदर रोग (जलोदर) चिकित्सा

दिन 21 – 23