अर्श (बवासीर), अतिसार (दस्त), ग्रहणी (दीर्घकालिक अपच), मूत्र रोग, प्रमेह (मधुमेह से संबंधित), विद्रधि (फोड़ा), गुल्म (पेट की गांठ) एवं उदर रोग (जलोदर) के कारण, वर्गीकरण व आयुर्वेदिक दृष्टिकोण पर आधारित व्यवहारिक कोर्स। हर दिन पर क्लिक करें और पूरी जानकारी पढ़ें।
यह पृष्ठ अष्टांगहृदयम् ग्रंथ के ज्ञान का शैक्षणिक सार-संक्षेप है, चिकित्सकीय सलाह नहीं। बवासीर में रक्तस्राव, लगातार दस्त, पेट में गांठ, फोड़ा, जलोदर या मधुमेह जैसे लक्षणों में स्वयं औषधि/क्षार-अग्नि-शल्य कर्म का प्रयोग न करें — किसी योग्य चिकित्सक या वैद्य से अवश्य परामर्श लें।